पाठ से

सुधा पूरे भारत में कैसे लोकप्रिय हो गई?


कृत्रिम पैर वाले व्यक्ति को नृत्य जैसा कठिन कार्य करने में बहुत मुश्किल होती है| सुधा चंद्रन ने आस नहीं छोड़ी और पूरे विश्वास से कृत्रिम पैर के साथ नृत्य का अभ्यास करने लगीं। ऐसा करते वक्त कई बार सुधा के पैर से खून भी बहा लेकिन उन्होंने अपने विश्वास को टूटने नहीं दिया। 28, जनवरी 1984 को मुंबई के साउथ इंडिया वेलफेयर सोसाइटी में नृत्यांगना प्रीति के साथ नृत्य का आमंत्रण स्वीकार कर लिया। सुधा के लिए यह मौका चुनौती पूर्ण था लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सुधा ने जबरदस्त नृत्य किया और रातोंरात लोकप्रिय हो गईं।


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